प्रतापगढ़ - कुंडा, जुलाई 6 -- Pratapgarh Kunda News: प्रतापगढ़, संवाददाता। कभी जिस चिलबिल के पेड़ चिलबिला के जंगल में सबसे अधिक थे, आज वे उंगली पर गिने जा सकते हैं। आम, महुआ, जामुन, अमरूद, नीम, कंजी आदि के पौधों की भरमार थी। लेकिन जब से कट सागौन को जंगल में प्रवेश मिला तब से इसने अन्य सभी पेड़ों को दबाकर धीरे-धीरे हटाना शुरू कर दिया। आज इस जंगल को जो भी देखता है वह इसे कट सागौन का जंगल ही समझता है। जबकि कट सागौन की लकड़ी जलाने के अलावा किसी काम नहीं आती। इसे देखते हुए वन विभाग आम, अमरूद, महुआ, जामुन आदि के पुराने पेड़ों को संरक्षण देने के साथ इनके नए पौधे भी रोप रहा है। वन विभाग के अधिकारी इस बारे में कंफर्म तो नहीं हैं लेकिन उनका अनुमान है कि चिलबिला के जंगल में कट सागौन का आगमन अंग्रेजों के समय में हुआ। तब से अन्य पेड़ों को दबाते हुए फैल...