नई दिल्ली, अक्टूबर 23 -- हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। इस दिन भक्त महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं। प्रदोष व्रत में शाम के समय होने वाली पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। लेकिन आखिर इस व्रत में प्रदोष काल को इतना खास क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं इसकी धार्मिक मान्यता, तिथि और पूजा का शुभ समय।23 अक्टूबर को प्रदोष व्रत पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर शुरू हो रही है। इसका समापन 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि में प्रदोष का...