नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ और प्रभावशाली समय माना जाता है। यह वह पवित्र काल है जब दिन और रात मिलते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं। इसलिए प्रदोष काल में की गई पूजा-अर्चना का फल कई गुना अधिक मिलता है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल 2026 को रात 12:12 बजे शुरू होगी और 16 अप्रैल को रात 10:31 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। प्रदोष काल का समय शाम 6:01 बजे से 7:31 बजे तक रहेगा। इस 90 मिनट के विशेष मुहूर्त में शिव पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।प्रदोष काल क्यों है इतना खास? प्रदोष काल में भगवान शिव की ऊर्जा चरम पर हो...
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