पटना, जुलाई 20 -- Patna News: बड़े-बड़े महापुरुष भी गलत संगत में पड़कर दूषित हो जाते हैं। भीष्म पितामह जैसे महापुरुष भी दुर्योधन की संगत में आने और उसका अन्न खाने के चलते दूषित हो गये थे। जिसके कारण उनको कष्ट झेलना पड़ा। पराक्रमी महापुरुष का भी मन दुष्ट व्यक्ति के साथ रहने से दूषित हो जाता है। अपने फायदे के लिए किसी दूसरे को कष्ट नहीं देना चाहिए। उक्त बातें श्री स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने मोतीपुर गांव में चल रहे श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ सह श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ में पांचवें दिन रविवार को प्रवचन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को पाप करने से बचना चाहिए। पापी की सहायता करना भी पाप ही है। इससे दोष लगता है। उन्होंने कहा कि इंद्रियों को जीतने का प्रयास करना चाहिए। भोजन शुद्ध होना चाहिए। भोजन शुद्ध है तभी मन व विचार शुद्ध ...