नई दिल्ली, मई 3 -- बच्चे नादान होते हैं और अक्सर ढेर सारी शरारतें करते हैं। अब उन्हें समझाकर सही चीजें सिखानी है या फिर डांटकर इसे तो पैरेंटस ही तय कर सकते हैं। क्योंकि हर बच्चे का मिजाज अलग होता है। लेकिन प्यार से समझाने से जितना समझ जाते हैं उतना डांटने से नहीं। लेकिन फिर भी दिन के कुछ मौके होते हैं जब पैरेंट्स अपने खराब मूड का शिकार बच्चों को बना देते हैं और उन्हें डांट लगाते हैं। लेकिन बच्चों को अगर आप हर वक्त डांटते हैं तो इससे बच्चों की बॉन्डिंग पैरेंट्स के साथ खराब होने लगती है। मासूम दिल पर इन डांट का गहरा असर होता है। बच्चे के साथ अपनी बॉन्डिंग को मजबूत बनाना है और दिल में अपने लिए खास जगह बनाकर रखनी है तो बच्चों को ऐसे मौके पर हरगिज ना डांटे। जबकि ज्यादातर पैरेंट्स इसी वक्त पर उन्हें डांटते चिल्लाते हैं, जिससे बच्चों के माइंड पर...
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