रांची, जून 28 -- एनआईए की जांच में बीएसएफ के फिरोजपुर, जालंधर और जैसलमेर कैंप से कारतूस की तस्करी कर आपराधिक गिरोहों और उग्रवादी समूहों को बेचे जाने का खुलासा हुआ है। जांच में यह बात सामने आई है कि बीएसएफ का पूर्व सिपाही अरुण कुमार सिंह उर्फ फौजी अपने सहयोगी रहे कार्तिक बेहरा के जरिए 100 रुपये में प्रति कारतूस हासिल कर इसे 400 रुपये के हिसाब से उग्रवादियों-अपराधी गैंग को बेचता था। एनआईए की जांच के अनुसार, पूरे गिरोह का मुख्य सूत्रधार अरुण 1992 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। 2003 में उसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। सेवाकाल के दौरान मणिपुर में तैनाती के समय उसका संपर्क 116वीं बटालियन के एमुनेशन एमसीयू कार्तिक बेहरा से हुआ था। कार्तिक ने अपने भाई की नौकरी के लिए फौजी से 2 लाख रुपये कर्ज लिए थे। सेवानिवृत्ति के बाद जब फौजी ने अपने पैसे वा...