नई दिल्ली, अगस्त 4 -- मध्य प्रदेश के शहडोल की रहने वाली शुभांगी मिश्रा की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो किसी एक परीक्षा में असफल होने के बाद अपना आत्मविश्वास खो देते हैं और निराश हताश होकर बैठ जाते हैं। शुभांगी इस बात की भी शानदार मिसाल है कि अगर आप मेहनती है तो करियर में फील्ड बदलकर भी कामयाब हुआ जा सकता है। इसमें हिचकिचाना नहीं चाहिए। शुभांगी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी दो बार दी। 12वीं के बाद एक साल का ड्रॉप लेकर नीट का पहला प्रयास दिया जिसमें उन्हें 400 अंक मिले। एक और ड्रॉप ईयर लिया। दूसरे प्रयास में उन्होंने 570 अंक हासिल किए। तीन साल तक लगातार मेहनत करने के बावजूद उन्हें एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिल पाया। बीडीएस मिल रहा था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना लक्ष्य बदला और सरकारी नौकरी की तैयारी शु...