नई दिल्ली, मार्च 23 -- चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है और इस दिन उनकी उपासना की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय को युद्ध के लिए तैयार करने वाली और उन्हें अपनी गोद में स्थान देने वाली मां स्कंदमाता का ये स्वरूप ममता और शक्ति का माना जाता है। माता रानी सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनकी चार भुजाएं हैं। उनकी ऊपरी दाहिनी भुजा में बाल स्वरूप कार्तिकेय विराजमान हैं, जबकि निचली दाहिनी भुजा में वे कमल का फूल रहता है। ऊपरी बाईं भुजा से वे भक्तों को वरदान देती हैं और निचली बाईं भुजा में भी कमल का फूल सुशोभित रहता है। उनके इस स्वरूप के दर्शन मात्र से ही मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है। ऐसा कहा जाता है कि मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान संबंधी कष्ट दूर ...
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