नई दिल्ली, अगस्त 14 -- यदि जन्म कुंडली में कहीं भी चंद्रमा एवं शनि का एक साथ योग है तो उसे योग को विष योग कहा जाता ।है विषयोग के प्रभाव से व्यक्ति के मन मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के अवसाद के कारण तनाव महसूस करता है। माता के स्वास्थ्य को लेकर तथा माता के विचारों को लेकर भी कष्ट की स्थिति उत्पन्न होती रहती है। इसके निराकरण के लिए भगवान शिव की उपासना श्रेष्ठ मानी गई है। इसी कारण से यदि श्रावण मास में भगवान शिव की उपासना किया जाए गंगाजल से अथवा गाय के दूध से अभिषेक किया जाए तो विषयोग से संबंधित नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। यदि यह उपाय नाग पंचमी के दिन किया जाए तो उसके परिणाम और भी सकारात्मक होते हैं।इस तिथि पर कालसर्प दोष का निवारण कैसे करें। जन्म कुंडली में जब राहु और केतु को छोड़कर सारे ग्रह राहु...