मुजफ्फरपुर, जुलाई 10 -- Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर। वरीय संवाददाता नदियों की लहरें थम जाती हैं, तालाब में उफनाया पानी सरक जाता है, लेकिन फाइलें नहीं सरकतीं। डूबने से मौत पर मुआवजे के मामले में सुस्ती का यही हाल है। इस साल अब तक दो दर्जन से अधिक बच्चियों और किशोरों की डूबने से मौत हो चुकी है। आठ परिवार ऐसे हैं, जिन्हें आज भी मुआवजे की राशि का इंतजार है।

मामलों का विवरण प्रशासनिक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2026 में डूबने से मरने वालों में अधिकतर 7 से 14 साल के बच्चे हैं। गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उनके लिए चार लाख की राशि मरहम से कम नहीं। अपनों की मौत का गम और दफ्तरों के चक्कर काटने की थकान लिए परिजनों को मुआवजे की राशि मिले तो मरहम का इंतजार खत्म हो।

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