मुजफ्फरपुर, अगस्त 31 -- Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर। हाथ के हुनर पर हावी होते पूंजी के बाजार में पुश्तैनी पेशे कैसे दम तोड़ रहे हैं, इसका उदाहरण शहर के दर्जी हैं। साढ़े तीन दशक पहले टेलर मास्टर और कपड़ों के कारीगर की समाज में अपनी पहचान होती थी। सम्मान के साथ बेहतर कमाई भी थी, लेकिन अब हालात बदतर हैं। दुकानें तो हैं, पर पहले की तरह गुलजार नहीं। कारीगर परिवार का पेट पालने के लिए टेंपो चलाने या मजदूरी करने को विवश हैं। नई पीढ़ी पारंपरिक काम से कटती जा रही है। आर्थिक संकट से जूझ रहे दर्जियों की अपेक्षा है कि इस पेशे को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार आगे आए। इन्हें योजनाओं से जोड़े, ताकि प्रतिस्पर्धा में टिके रह सकें। साढ़े तीन दशक पहले दर्जी के कारोबार का स्वर्णिम काल था। शहर से गांव तक टेलर मास्टर और कारीगर की समाज में अपनी पहचान होती थी। सम...