मुजफ्फर नगर, अक्टूबर 24 -- Muzaffarnagar News: खतौली तहसील रोड पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक प्रवीन तिवारी ने घुव्र का वर्णन उत्साह के साथ किया। बताया कि ध्रव के जीवन से हमें बहुत ज्ञान मिलता है। जो अर्थ का आतुर होता है वो संबंधवादी नहीं होता है। जिसने जीवन में केवल अर्थ को पकड़ा है उसके जीवन में ना तो कोई गुरू होता है और न ही भाई होता है। वो पैसों को ही सब कुछ समझने लगता है। इसलिए उसका मतलब एक ही होता है उसमे अंहकार होता है जो सबसे बड़ा इंसान अपने को ही समझने लगता है। घ्रव जैसी स्तुति और प्रहलाद जैसी प्रार्थना भागवत से किसी से नहीं की है। कहा कि अगर कहीं पर भगवान मिले तो उससे भगवान के अलावा कुछ नहीं मांगना। कहा कि माता अनुसुईया के चरित्र से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भारत की माता ने भारतीय संस्कृति को इतनी उचाई तक पहुंच...