मुंगेर, अगस्त 11 -- Munger News: मुंगेर, निज प्रतिनिधि। जिले को हरा-भरा बनाने के नाम पर हर साल बड़े पैमाने पर पौधरोपण होता है। अभियान बदलते रहे, योजनाओं के नाम बदलते रहे, लेकिन पौधरोपण का सिलसिला जारी है। वन विभाग, मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से फलदार, छायादार और लकड़ी वाले पौधे लगाए जा रहे हैं। पौधे लगाने के बाद तीन साल तक उनके रखरखाव के लिए भी सरकारी राशि खर्च किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि कागज पर लगाए गए लाखों पौधों में जमीन पर आज कितने पौधे जिंदा हैं? पौधरोपण की उपलब्धि को अक्सर लगाए गए पौधों की संख्या से मापा जाता है, लेकिन असली सफलता पौधों के पेड़ बनने से तय होगी। इसके लिए पौधरोपण के तीन साल बाद तक उनकी जीवित स्थिति की निगरानी जरूरी है। मुंगेर में इस पूरे मामले की पंचायतवार और योजनावार पड़ताल की जाए तो पौधरोपण पर...