मुंगेर, अगस्त 12 -- Munger News: मुंगेर,हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। योग विद्यालय के पादुका दर्शन संन्यास पीठ में चातुर्मास अनुष्ठान अंतर्गत चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को अलग-अलग नहीं बांटा जा सकता है। ये आध्यात्मिक जीवन की परस्पर जुड़ी अवस्थाएं हैं। नारद भक्ति सूत्र में भक्ति को परम प्रेम की जागृति के रूप में समझाया गया है। इसलिए भक्ति केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर प्रेम, करुणा और सकारात्मक दृष्टि के विकास की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि, भक्ति का वास्तविक प्रयोजन मनुष्य की भावनाओं को सकारात्मक, निर्मल और परिष्कृत बनाना है। जबतक भावनाएं सकारात्मक नहीं होंगी, तबतक भक्ति का वास्तविक भाव उत्पन्न नहीं हो सकता। इसके लिए मनुष्य को अपनी भाव...