ग्वालियर, सितम्बर 13 -- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि 45 साल पुराने 'मध्य प्रदेश डकैती और अपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम' को क्यों न रद्द कर दिया जाए। यह कदम एक जनहित याचिका (पीआईएल) के बाद उठाया गया है। याचिका में बताया गया था कि राज्य को डकैती मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद 2020 से अब तक इस कानून के तहत 1000 से ज्यादा लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक और चंबल व ग्वालियर रेंज के पुलिस अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि इस कानून को क्यों न रद्द कर दिया जाए। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिविजनल बेंच ने राज्य सरकार को इस कानून के तहत लंबित मामलों की स्थिति बताने का निर्देश दिया। ये नोटिस पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस ...