महोबा, अक्टूबर 4 -- Mohoba News: चरखारी, संवाददाता। श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास ने परमात्मा की भक्ति को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति का मार्ग बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल श्रवण का विषय नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन में परिवर्तन का माध्यम है। नगर के राजगुरु आवास में श्रीमद्भगवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि जन्म और मृत्यु जीवन के सबसे बड़े दुख है। मनुष्य जीवन का वास्तविक लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति है। कहा कि शरीर का संबंध संसार से है जबकि आत्मा का संबंध परमात्मा से है। मृत्यु के बाद शरीर संसार में रह जाता है जबकि आत्मा परमात्मा के पास पहुंच जाती है। यह भी पढ़ें- नाम स्मरण करने से प्रभू को पाना संभव- अतुल कृष्ण भारद्वाज शरीर नष्ट होने के बाद धन, दौलत, नाते रिश्तेदार और वैभव सब यहीं रह ...