मिर्जापुर, अक्टूबर 15 -- Mirzapur News: मिर्जापुर,संवाददाता। अनंत चर्तुदशी से प्रारंभ होने वाली रामलीला के परंपरागत स्वरूप में बदलाव आ गया है। पहले रामलीला में ध्वनि के ढोल,कनस्टर बजाया जाता है। पेट्रोमेक्स या लालटेन की रोशनी में रामलीला होती। पात्र बिना ध्वनि विस्तारक यंत्र के मधुवार संवाद बोलते यह अलग है कि रामलीला व्यास पात्रों को संवाद पुस्तिका से संवाद बोल कर बोलवाते,लेकिन अब यह सब कुद पूरी तरह से बदल चुका है। संवाद के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों ने लिया है। प्रकाश के लिए पेट्रोमेक्स और लालटेन अब शायद ही किसी के घर में भी देखने को मिले। उसकी जगह अब बिजली की चौकाचौंध रोशनी ने लिया है। पुराने मेखला सनीला के कपड़े की जगह साज सज्जा ने ली है। पात्रों राम-लक्ष्मण और सीता सहित अन्यपात्रों का बाकायदे मेकअप किया जाने लगा है। लगभग 100 साल पुरान...