मेरठ, जुलाई 27 -- Meerut News: श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर पर आषाढ़ की अष्टान्हिका पर्व पर नंदीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे 1008 नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान में सोमवार को मांडले पर 600 अर्घ समर्पित किए गए। सर्वप्रथम श्रद्धालुओं ने शांतिनाथ भगवान का जलाभिषेक व मंगलाष्टक के साथ विधान की क्रियाएं प्रारंभ की। शांतिधारा पवन जैन, रमन जैन, राज कुमार जैन, साधना जैन ने की। मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि आत्मा का स्वरूप सिद्धत अवस्था को प्राप्त करना है आज व्यक्ति अपने हित को छोड़कर दूसरों के अहित में लगा हुआ है। वह अपने दुख से दुखी न होकर दूसरों के सुख से दुखी है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए व्यक्ति को अपने अवगुण देखने चाहिए और दूसरे के गुणों को देखना चाहिए और उस जैसा बनने का प्रयत्न करना चाहिए यदि ऐसा व्यक्ति करने लगे तो वह सर्वोच्च पद को प्राप...