नई दिल्ली, सितम्बर 5 -- इस अटेम्प्ट लिमिट का इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि उस छात्र ने प्रत्येक प्रयास में किन-किन विषयों की परीक्षा दी थी। कोर्ट ने यह फैसला एक एमबीबीएस छात्रा की उस याचिका को खारिज करते हुए दिया जिसमें उसने एनाटॉमी की परीक्षा चौथी बार देने की इजाजत मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में पढ़ने वाली छात्रा प्रथम वर्ष के लिए पहले ही चार प्रयास कर चुकी थी और इसलिए उसे एक और मौका नहीं दिया जा सकता। जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला और जस्टिस आर. आई. चागला की खंडपीठ छात्रा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसने महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (MUHS) की ओर से आयोजित एनाटॉमी की थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। याचिकाकर्ता ने अगस्त 2023 में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में दाखिला लिया ...