मऊ, नवम्बर 5 -- Mau News: मऊ, संवाददाता। सेवा, सुमिरन, सत्संग, दान और भजन से विमुख रहने वाला मनुष्य जीते जी मुर्दे के समान है। परमात्मा ने मनुष्य जीवन इन सत्कर्मों को करने के लिए ही प्रदान किया है। सुख-दुख प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आते हैं, लेकिन सत्संग के माध्यम से ही मनुष्य की विवेक रूपी आंख जागृत होती है। यह सद्विचार परमसंत स्वामी जय गुरु वंदे जी महाराज ने नगर के हकीकतपुर में आयोजित सत्संग समारोह में भक्तों के बीच व्यक्त किए। स्वामी जी महाराज ने कहा कि जीव जब माता के गर्भ में उल्टा लटका रहता है, तब वह परमात्मा से संकल्प करता है कि जीवन मिलने पर अपना पूरा समय प्रभु के सुमिरन और भजन में व्यतीत करेगा। लेकिन संसार में जन्म लेने के बाद माया रूपी सागर और सांसारिक चकाचौंध में फंसकर वह अपने संकल्प को भूल जाता है। इस अवसर पर श्रीराम यादव, शि...