मैनपुरी, अगस्त 3 -- Mainpuri News: नगर के मोहल्ला गाड़ीवान ​स्थित प्राचीन श्री भीमसेन मंदिर में श्रावण मास महोत्सव के तहत श्रीरामचरितमानस कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के पंचम दिवस पर आचार्य शशिकांत तिवारी रामायणी ने भरत के प्रेम और त्याग एवं निष्ठा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अयोध्या के इतिहास में यदि भ्रातृप्रेम का सर्वोच्च आदर्श किसी ने प्रतिष्ठित किया है तो वह हैं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और त्यागमूर्ति भरत। आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम के मध्य न राज्य का मोह था, न वैभव का आकर्षण, न स्वार्थ का लेशमात्र स्पर्श। श्रीराम ने पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मान वनगमन स्वीकार किया, तो भरत ने भ्रातृधर्म की परम पवित्र मर्यादा निभाते हुए राज सिंहासन का पूर्ण परित्याग कर दिया। यह भी पढ़ें- निजी क्षति पर भी प्रभु ने पिता का सम्मान रखा आचार्...