नई दिल्ली, मार्च 31 -- Mahavir Swami Jayanti 2026 : महावीर जैसी आत्माएं अपनी यात्रा पिछले जन्म में ही पूरी कर चुकी होती हैं। इस जन्म में इस संसार में आने की प्रेरणा के पीछे उनकी अपनी कोई वासना नहीं है। सिर्फ करुणा कारण है। तीर्थंकर का अर्थ है, वह आत्मा जो राह दिखाने के लिए पैदा हुई है। साधारण आत्मा तीर्थंकर नहीं हो सकती, क्योंकि जो स्वयं मार्ग खोज रहा हो, वह मार्ग नहीं दिखा सकता। मार्ग क्या है, यह मंजिल पर पहुंच कर ही पता चलता है। मंजिल पर पहुंच जाना इतना कठिन नहीं है, जितना मंजिल पर पहुंच कर मार्ग पर वापस लौटना। ऐसी आत्माएं तीर्थंकर कहलाती हैं। तीर्थंकर का अर्थ है- वह मल्लाह, जो घाट से पार होने का रास्ता बताए। सच में जो विशिष्ट होता है, उसका प्रारंभिक जीवन घटना शून्य होता है, इसलिए क्योंकि वह लौटा है औरों के लिए, अपने लिए नहीं। बस वह चुप...
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