नई दिल्ली, फरवरी 2 -- हिंदू ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष एक प्रमुख कुंडली दोष माना जाता है। जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तो राहु को सर्प का मुंह और केतु को पूंछ मानकर इसे कालसर्प दोष कहा जाता है। यह दोष जीवन में आर्थिक, वैवाहिक, स्वास्थ्य और मानसिक कष्टों का कारण बनता है। विशेष रूप से विवाह पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है - विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में कलह, अलगाव या संतान प्राप्ति में बाधा आ सकती है। लेकिन शास्त्रों में महाशिवरात्रि को कालसर्प दोष निवारण का सर्वोत्तम अवसर माना गया है। भगवान शिव की आराधना से इस दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को पड़ रही है। आइए जानते हैं इसका महत्व और उपाय।कालसर्प दोष क्या है और इसके प्रकार कालसर्प दोष तब बनता है जब...
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