लखनऊ, अगस्त 7 -- Lucknow News: लखनऊ, संवाददाता। आशियाना में आयोजित चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत जैन आचार्य श्री मानतुंगाचार्य विरचित श्री भक्ताम्बर स्तोत्र की 48 गाथाओं पर आधारित प्रवचन श्रृंखला में उपाध्याय श्री 108 वीहसंत सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सत्कर्म, सेवा और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म ही भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं और प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। जो जैसा बोता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। उपाध्याय श्री ने कहा कि पूर्व जन्मों एवं अतीत में किए गए कर्म पहले से संचित धन के समान हैं, जिन्हें हम वर्तमान जीवन में भोग रहे हैं। यह भी पढ़ें- Lalitpur News: प्रभु भक्ति में ही जीवन की शान्ति: विशद सागर यदि आज हम सेवा, दया, परोपकार और धर्म के माध्यम से पुण्य का संचय नहीं करेंगे तो भव...