ललितपुर, सितम्बर 21 -- Lalitpur News: ललितपुर। संयमी व्यक्ति का जीवन संयत और निर्मल रहता है। संयम जीवन की प्रथम सीढ़ी है। इसके लिए सतत साधना की जरूरत है। जो वस्तु मन से उतर जाती है, उसका हमेशा के लिए निषेध हो जाता है। अटा जैन मंदिर में यह उद्गार आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि विशद सागर महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने संयम को उत्कृष्ठ साधना बताते हुए कहा कि इसकी आराधना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना है, जिसके बंधन में बंधा मनुष्य का जीवन परोपकारी और शान्ति के सागर को प्राप्त कर लेता है। मनिश्री ने कहा कि जिनको हम मन से निषिद्ध कर देते हैं और मन पर हावी नहीं होने देते। यह भी पढ़ें- Etah News: संयम धर्म के बिना जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी के समान संयम जीवन की प्रथम सीढ़ी है, इसके लिए सतत साधना की जरूरत है। इससे पूर्व नगर के पार्श...