ललितपुर, अक्टूबर 8 -- Lalitpur News: ललितपुर। खाकी वर्दी पहन सिर पर टोपी लगाए साइकिल से चलने वाले डाकिये अब भूलेबिसरे दिनों की यादें बनकर रह गए हैं। पहले दूर दराज रहने वाले पति, पुत्र, पिता, भाई मित्र की चिट्ठी लाने के लिए इनका इंतजार रहता था लेकिन मौजूदा समय में डिजिटल क्रांति ने डाक सेवा के इस स्वरूप को बदलकर रख दिया है। पहले अपने लोगों को संदेश भेजने के लिए डाक सेवा ही एक माध्यम था। डाक खाने जाकर लोग पोस्टकार्ड, अंदरदेशी आदि खरीदकर रख लिया करते थे और फिर अपने करीबियों को यह खत भेजते थे। लोगों को इन चिट्ठियों का इंतजार रहता था। यह भी पढ़ें- डिजिटल युग में बैंकिंग, बीमा और पार्सल सेवाओं का केंद्र बने डाकघर गली से गुजरते डाकिये को लोग रोककर चिट्ठी के लिए जानकारी लेते थे। परदेश में काम करने वाले बेटे के मनीआर्डर का उसके वृद्ध माता पिता को ...