कुशीनगर, अगस्त 22 -- Kushinagar News: कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। पडरौना राजदरबार की सीलिंग में गई 1503.57 एकड़ जमीन अब सरकारी अभिलेखों का हिस्सा बन रही है, लेकिन कागज पर दर्ज यह रकबा जमीन पर एक जैसा नजर आएगा, यह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। चार तहसीलों के 90 से अधिक गांवों में फैली जमीन के छोटे-बड़े टुकड़ों को मौके पर खोजकर उनके गाटे और सीमाएं तय करनी होंगी। इसके बाद ही यह साफ हो सकेगा कि सीलिंग में शामिल जमीन का कितना हिस्सा खेती में है, कहां आबादी बसी है और किन स्थानों पर दूसरे निर्माण हो चुके हैं। मामले के अंतिम निस्तारण के बाद अब कार्रवाई का केंद्र न्यायालय नहीं, राजस्व विभाग के फील्ड कर्मचारी होंगे। उन्हें पुराने राजस्व अभिलेखों को मौके की स्थिति से मिलाना होगा। लंबे समय से लंबित मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जिस जमीन को दशकों ...