कोडरमा, नवम्बर 7 -- Kodarma News: झुमरी तिलैया, निज प्रतिनिधि। आधुनिकता के दौर में भले ही दीपावली पर रंग-बिरंगी इलेक्ट्रॉनिक लाइटों और सजावटी एलइडी बल्बों का क्रेज बढ़ा हो, लेकिन मिट्टी के दीयों का महत्व आज भी बरकरार है। मिट्टी के घरों से लेकर बड़े घरों में कम हीं सही मगर दीये का उपयोग हो रहा है। दीपावली का पर्व पारंपरिक मिट्टी के दीपक के बिना अधूरा माना जाता है। यही वजह है कि बाजारों में आधुनिक सजावटी सामानों के साथ मिट्टी के दीयों की भी खरीदारी होती है। लोग घरों के आंगन, तुलसी चौरा, पूजा स्थल और दरवाजों पर मिट्टी के दीपक जलाकर परंपरा निभाते हैं। यह भी पढ़ें- Kodarma News: दीपावली को लेकर रौशनी से जगमगाया शहर, बाजारों में खरीदारी को लेकर भीड़ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक को प्रकाश, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। मान्य...