खगडि़या, अक्टूबर 16 -- Khagaria News: खगड़िया । हिन्दुस्तान टीम बदलते परिवेश में आज लोक गाथा पर आधारित अभिनय गांव समाज से विलुप्त होता जा रहा है। आज स्थिति यह है की बढ़ते टीवी व मोबाइल युग में दिन प्रतिदिन सामाजिक सुधार पर आधारित लोक गाथा कार्यक्रम पर दिन प्रतिदिन पानी फिरता जा रहा है, लेकिन इसे जीवंत रखने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। इधर परबत्ता के स्थानीय बुजुर्ग 70 वर्षीय नन्दलाल मंडल, अर्जुन मंडल आदि ने बताया की करीब चार दशक पूर्व दुर्गा पूजा, कार्तिक पूजा व अन्य महोत्सव के दौरान लोक गाथा पर आधारित, आल्हा रुदल, सती अनसुईया, राजा बृजभान, चौहरमल डाकू, राजा ढोलन, शीत वसंत आदि लोग गाथा पर आधारित अभिनय का मंचन किया जाता था। आग समाज में कार्यक्रम की खबर मिलते ही लोग एक गांव से दूसरे गांव पहुंचकर कार्यक्रम का भरपूर आनद लेते थे। यहां त...