कौशाम्बी, सितम्बर 5 -- Kausambi News: कालिंदी का किनारा शनिवार की शाम तीन मासूम जिंदगियों के बुझने का गवाह बन गया। बच्चों के शव जैसे ही किनारे लाए गए, अपनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। जिगर के टुकड़ों को खोने के गम में माएं बेसुध हो गईं। परिजनों की चीत्कारें पोस्टमार्टम हाउस में भी गूंजती रहीं। घटना से पूरा इलाका स्तब्ध है और हर आंख नम है। परिवार पर क्या बीत रही है, इसका अंदाजा शब्दों में बयां करना कठिन है। करन और शनि सगे भाई थे। लगभग हमउम्र होने के कारण चचेरे भाई बृजेंद्र से दोनों की खूब बनती थी। ग्रामीण बताते हैं कि तीनों ज्यादातर एक साथ ही खेला करते थे। शनिवार की शाम वह खेलते-खेलते ही यमुना किनारे पहुंच गए। मासूमों को क्या पता था कि इसके बाद वह कभी लौटकर घर नहीं पहुंचेंगे। कालिंदी की गोद में उतरे तो हमेशा-हमेशा के लिए जहां से र...