झांसी, अक्टूबर 12 -- Jhansi News: झांसी। दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव भी आवश्यक है। बेटियों को दहेज देने के बजाय उन्हें शिक्षा, समान अधिकार और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराना ही इस कुप्रथा को समाप्त करने का प्रभावी माध्यम है। यह बात बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षा संस्थान की सहायक डॉ. सुषमा अग्रवाल ने दहेज विरोधी जागरूकता संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कही। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के महिला अध्ययन केंद्र एवं शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को दहेज प्रथा के उन्मूलन एवं महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचारों की रोकथाम के उद्देश्य से संगोष्ठी की गई। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय के मार्गदर्शन तथा महिला अध्ययन केंद्र की नोडल अधिकारी एवं ह...