जौनपुर, अगस्त 26 -- Jaunpur News: बदलापुर, हिन्दुस्तान संवाद। घनश्यामपुर बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर पर चल रही सात दिवसीय राम कथा महोत्सव में वाराणसी से पधारे कथा वाचक डॉ. मदन मोहन मिश्र ने कहा कि सात्विक वृत्तियों का संग ही सत्संग है और तामसीक प्रवृत्तियों का संग ही कुसंग है। कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। इसलिए हमें हमेशा सत्संग करना चाहिए। कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सती ने सीता का वेष तो बनाया लेकिन आचरण नहीं बना पायीं क्योंकि असली सीता राम के पीछे चलती थी, जबकि सीता बनीं हुई सती राम के आगे चलने लगी। इसलिए नकल के लिए भी अक्ल की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि दक्ष का यज्ञ इसलिए पूर्ण नहीं हुआ क्योंकि उसमें यज्ञ के स्वरूप विष्णु यज्ञ की विधि ब्रह्मा और विश्वास के प्रतीक शंकर उपस्थित नहीं थे। जहां जाने के बाद विवाद होने की संभावन...