नई दिल्ली, सितम्बर 3 -- भाद्रपद की अंधेरी रात थी। मथुरा की जेल में पहरा कड़ा था। बाहर कंस का आतंक था और भीतर देवकी-वसुदेव अपने आठवें पुत्र के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे थे। कहा जाता है कि जैसे ही आधी रात का समय आया, कारागार में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। जिस समय चारों ओर भय और अत्याचार का माहौल था, उसी समय एक ऐसे बालक का जन्म हुआ जिसने आगे चलकर अधर्म के विरुद्ध धर्म की सबसे बड़ी मिसाल कायम की। यही वजह है कि जन्माष्टमी को सिर्फ भगवान कृष्ण के जन्मदिन के तौर पर नहीं देखा जाता। इस पर्व के पीछे समय, तिथि, नक्षत्र और कृष्ण की जन्मकथा-चारों का गहरा संबंध माना जाता है।4 सितंबर को जन्माष्टमी, आधी रात में होगा जन्मोत्सव साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी ...