संतोष आर्यन, अप्रैल 7 -- सेना की पोर्टर भर्ती का ट्रेंड बदल रहा है। इस काम की रीढ़ माने जाने वाले नेपाली युवा अब पूरी तरह नदारद हैं, उनकी जगह यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के युवाओं की भीड़ उमड़ रही है। हिमालय की दुर्गम परिस्थितियों में सेना का महत्वपूर्ण मददगार माने जाने वाले पोर्टर के काम से नेपाली युवाओं का मोहभंग होता दिख रहा है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर धारचूला में सोमवार से भारतीय सेना की पांच दिवसीय पोर्टर भर्ती शुरू हुई। सेना के अनुसार, पहले दिन नेपाल मूल का एक भी अभ्यर्थी शामिल नहीं हुआ। जबकि पहले पोर्टर के लिए सेना धारचूला स्थानीय युवाओं के अलावा नेपाली नागरिकों पर अधिक निर्भर रहती थी। स्थानीय जितेंद्र वर्मा, सोनू मर्तोलिया का कहना है कि अब नेपाली युवक पोर्टर बनने नहीं आ रहे हैं। अस्थायी पद होने के कारण पोर्टर भर...
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