नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- भारत के कई होनहार युवाओं की तरह ही मृगांग सुर ने अपने करियर की शुरुआत की। 1974 में उन्होंने IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की। उस जमाने में सर्किट और सिस्टम बनाना ही उनकी दुनिया थी। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में MS और PhD की डिग्री हासिल की। कागजी तौर पर उनका रास्ता बिल्कुल साफ था- इंजीनियर, रिसर्चर और इंजीनियरिंग के प्रोफेसर। लेकिन लैब के काम के बीच उनका फोकस दूसरी तरफ चला गया। उन्हें एहसास हुआ कि मस्तिष्क प्रकृति की बनाई सबसे ताकतवर कंप्यूटिंग मशीन है। और इंसान की बनाई किसी भी दूसरी मशीन के उलट यह खुद को बदल सकता है, हालात के हिसाब से ढाल सकता है और खुद को फिर से नया कर सकता है। यही विचार - जिसे 'ब्रेन प्लास्टिसिटी' (मस्तिष्क ...
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