नई दिल्ली, मई 27 -- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का चार दिवसीय भारत दौरा भले ही कूटनीतिक मुस्कान और गर्मजोशी से भरा दिखा हो, लेकिन इसके पीछे ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियों का साया स्पष्ट रूप से नजर आया। एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड नियमों में हो रही सख्ती, व्यापारिक टैरिफ और रूस के साथ भारत के ऊर्जा समझौतों पर अमेरिकी दबाव का सीधा असर भारतीय पेशेवरों के भविष्य और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान के प्रति अमेरिका के बदलते रुख ने भी नई दिल्ली की भू-राजनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसीलिए कहा जाता है कि कूटनीति की दुनिया में जो मंच से दिखता है, असलियत अक्सर उससे बिल्कुल अलग होती है। एक तरफ मंच से "आई लव मोदी" के नारे गूंज रहे हैं, तो दूसरी तरफ बंद कमरों में 'अमेरिका फर्स्ट' के नाम पर व्यापारिक दबाव की भारी राजनीति...