नई दिल्ली, फरवरी 24 -- दिलीप त्रिवेदी, सेवानिवृत्त महानिदेशक, केद्रीय रिजर्व पुलिस बल दुर्दांत नक्सली थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवुजी का आत्मसमर्पण लाल गलियारे के सिमटने का एक और बड़ा उदाहरण है। देवुजी का हथियार डालना कितनी अहमियत रखता है, इसका पता इससे भी चलता है कि पिछले साल मई में बसवाराजू के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद देवुजी को ही नक्सल संगठन भाकपा (माओवादी) का अगला महासचिव माना जा रहा था। वह केंद्रीय समिति व पोलित ब्यूरो के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुका है और कई राज्यों में माओवादी योजना को अंजाम तक पहुंचाने व समन्वय बनाने का काम भी कर चुका है। जाहिर है, नक्सलवाद अब लगभग नेतृत्वहीन हो चुका है। यह आत्मसमर्पण उस सूबे (तेलंगाना) में हुआ है, जो पीपुल्स वार ग्रुप (पीडब्ल्यूजी) का उद्गम स्थल रहा है। यहीं से यह संगठन पश्चिम बंग...
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