नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं माना जाता है। इसे माता अन्नपूर्णा का स्वरूप कहा गया है। शास्त्रों में भोजन को पवित्र और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कई घरों में माताएं-बहनें अक्सर कहती हैं कि खाना हमेशा थोड़ा ज्यादा ही बनाना चाहिए। यह सिर्फ भूख मिटाने की बात नहीं है, बल्कि प्राचीन परंपराओं, अतिथि देवो भवः की भावना और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जुड़ा गहरा कारण है।अन्न का सम्मान और लक्ष्मी का वास शास्त्रों के अनुसार, जिस घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती, वहां माता लक्ष्मी और अन्नपूर्णा का स्थायी वास माना जाता है। जरूरत से थोड़ा ज्यादा भोजन बनाना इस बात का प्रतीक है कि घर में बरकत है और भंडार भरे हुए हैं। जब रसोई में अन्न की अधिकता रहती है, तो घर का वातावरण समृद्ध और सकारात्मक बना ...
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