हमीरपुर, अक्टूबर 9 -- Hamirpur News: हमीरपुर, संवाददाता। टीवी के बाद मोबाइल क्रांति में रामलीला का मंचन सीमित हो गया और धीरे-धीरे कलाकार उपेक्षा का शिकार होने लगे। कई सुप्रसिद्ध रामलीलाएं बंद हो गईं। अब जो रह गई हैं वो कई तरह के संकटों से जूझ रही हैं। कलाकारों के अभाव के चलते एक ही कलाकार कई-कई चरित्रों के अभिनय कर रहे हैं। कभी गांवों से होकर शहर तक आया रामलीला मंचन पर वर्तमान समय में आधुनिक युग का असर है। रामलीला से जुड़े कलाकार जीविकोपार्जन के लिए दूसरे कार्य करने को मजबूर हैं। उन्हें शासन-प्रशासन से किसी किस्म की कोई मदद नहीं मिलती है। रामलीला हमारी संस्कृति का अंग है। ऐसी लीलाओं से जुड़े कलाकारों को सरकार द्वारा प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि कलाकार पूरे मनोयोग से इस काम को कर सकें। हालांकि कुछ खास मौकों पर ही ऐसे आयोजन होते हैं। उनमें भी द...