हल्द्वानी, अक्टूबर 1 -- Haldwani News: पूनम मौर्य, हल्द्वानी। उम्र के साथ कदमों की रफ्तार भले धीमी हो जाए, लेकिन जिंदगी की जिम्मेदारियां हर किसी के लिए धीमी नहीं पड़तीं। किसी के लिए 60-70 की उम्र अनुभव को समाज के काम लाने और अपने जुनून को जिंदा रखने का समय है, तो किसी के लिए बढ़ती महंगाई के बीच रोजी-रोटी की जद्दोजहद जारी रखने की मजबूरी। अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर हल्द्वानी में बुजुर्ग जिंदगी के ऐसे ही दो अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। वर्दी उतरी, सेवा का जज्बा नहीं यह भी पढ़ें- Mathura News: अपनत्व का अहसास कराती है कृष्णा कुटीर की ममतामयी छांवप्रोफेशनल कथक डांसर की कहानी अल्मोड़ा निवासी 82 वर्षीय आनंद ठिठोलिया ने वर्ष 1965 में सैनिक के रूप में भारतीय नौसेना में सेवा शुरू की थी। वर्ष 1980 में पेटी ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उ...