हल्द्वानी, अक्टूबर 15 -- Haldwani News: हल्द्वानी, संवाददाता। हुनर को अगर सही दिशा मिले तो गांव की चौखट से भी रोजगार के नए रास्ते खोल सकती हैं। ग्रामीण महिलाएं अब पशुपालन से लेकर हस्तनिर्मित उत्पादों तक के जरिए अपनी अलग पहचान बना रही हैं। कोई दूध बेचकर रोजाना कमाई कर रही है, तो कोई ऊन से बैग और फ्लावर पॉट बनाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। वहीं ऐपण कला से जुड़े उत्पादों की मांग देश से लेकर विदेश तक पहुंच रही है। टांडा गांव की गीता रोज बेच रही 25 लीटर दूध

पशुपालन और हस्तनिर्मित उत्पादों से आजीविका ओखलकांडा के टांडा गांव की गीता देवी पशुपालन के जरिए अपनी आजीविका चला रही हैं। उनके पास तीन भैंस हैं और वह प्रतिदिन करीब 25 लीटर दूध बेचती हैं। उन्होंने बताया रोजाना लगभग 1500 रुपये की कमाई होती है। जिससे वे अपनी आर्थिकी चलाती हैं। ऊन की कला...