गिरडीह, अक्टूबर 14 -- Gridih News: बेंगाबाद, प्रतिनिधि। नवरात्र के पावन अवसर पर मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ की जाती है। काशी विश्वनाथ अन्नपूर्णा मंदिर के अर्चक पं. अर्जुन पांडेय ने बताया कि भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इनकी गोद में बालरूप भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं और कमल के आसन पर विराजित होने के कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। पं. पांडेय ने बताया कि मां का स्वरूप वात्सल्य, करुणा, त्याग, ममता और दिव्य शक्ति का अनुपम प्रतीक है। मां का श्वेत वर्ण पवित्रता, शांति और निर्मलता का प्रतीक माना जाता है। यह भी पढ़ें- Navratri 5th Day Wishes 2026: मां स्कंदमाता की बरसेगी कृपा, अपनों को शेयर करें ये टॉप 15+ मैसेज उनका स्वरुप हमे...