गिरडीह, अक्टूबर 10 -- Gridih News: बेंगाबाद, प्रतिनिधि। काशी विश्वनाथ अन्नपूर्णा मंदिर के अर्चक पंडित अर्जुन पांडेय ने कहा कि शारदीय नवरात्र में श्रद्धा-भक्ति से मां शैलपुत्री की आराधना करने पर मनोवांछित फल मिलता है। उन्होंने बताया कि मां जगदंबा के नवदुर्गा स्वरूपों में प्रथम स्वरूप शैलपुत्री है। हिमालय की पुत्री होने से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इन्हें पार्वती, हेमवती और सती के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल है और वे वृषभ पर सवार हैं।पंडित पांडेय ने कहा कि मां शैलपुत्री की कृपा से कठिन परिस्थितियों से लड़ने का साहस, इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह भी पढ़ें- Navratri Kalash Sthapana: नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना कब करें? जा...