गिरडीह, अक्टूबर 17 -- Gridih News: पीरटांड़, प्रतिनिधि। जीवन में सफलता और असफलता को अंतिम सत्य मानने की बजाय व्यक्ति को अपने पुरुषार्थ, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास पर ध्यान देना चाहिए। अनुकूल परिस्थितियों में प्रतिकूलता का अभ्यास और विपरीत परिस्थितियों में सहनशीलता की साधना जीवन को संतुलित बनाने का मूलमंत्र है। सुख के समय प्राप्त ज्ञान कई बार दुख आने पर कमजोर पड़ जाता है। इसलिए व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए पहले से ही मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी समता और प्रसन्नता बनाए रखना ही वास्तविक गुरु कृपा है। उक्त बातें गुणायतन में साधनारत राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कही। बताया जाता है कि मधुबन स्थित गुणायतन में आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में मुनि प्रमाण सागर जी महाराज उपस्थित श्रद...