गिरडीह, नवम्बर 1 -- Gridih News: पीरटांड़। आदिवासियों की आस्था और अस्मिता का प्रतीक मरांग बुरु पारसनाथ अब देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहा है। संथाल आदिवासी समाज के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाले मरांग बुरु की तलहटी में स्थित दिशोम मांझी थान भी धीरे-धीरे एक प्रमुख पूजनीय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। आदिवासी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार, यहां दिशोम मांझी थान और जुग जाहेर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। समय के साथ इस धार्मिक स्थल के प्रति आदिवासी समाज की आस्था बढ़ी है और इसके स्वरूप में भी व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यहां केवल स्थानीय आदिवासी ही नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता भी शीश झुकाने पहुंचते हैं। बतला दें कि 5 नवंबर को पारसनाथ में आयोजित संथाल आदिवासियों के अंतरराष्ट्रीय ...