गिरडीह, अगस्त 11 -- Gridih News: पीरटांड़, प्रतिनिधि। परिवार और समाज में बढ़ती दूरियों, तनाव और टूटते रिश्तों का प्रमुख कारण अहंकार है। संवादहीनता और समन्वय का अभाव होता है। यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में मिलनसारिता, विनम्रता, सामंजस्य और दूसरों की भावनाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित कर ले, तो अधिकांश विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं। उक्त बातें राष्ट्रसंत मुनि प्रमाण सागर जी महाराज ने गुणायतन में आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कही।

समाज में अहंकार की भूमिका गुणायतन में साधनारत राष्ट्र संत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि संसार में विभिन्न स्वभाव के लोग रहते हैं। कुछ हर वातावरण में सहजता से घुल-मिल जाते हैं, जबकि कुछ अपने विचारों और आग्रहों में इतने बंध जाते हैं कि किसी के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते। उन्होंने कह...