गिरडीह, सितम्बर 21 -- Gridih News: झारखंडधाम, प्रतिनिधि। जिन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके हाथों को हुनर देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र बनाया गया था, आज वही सरकारी भवन अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। जमुआ प्रखंड के तारा पंचायत अंतर्गत बारोटांड़ गांव में वर्ष 2011-12 में करीब 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं का प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र वर्षों से बंद पड़ा है। हालात यह है कि जिस भवन में महिलाओं के प्रशिक्षण और उत्पादन की गतिविधियां चलनी थीं, वहां अब पशुओं ने अपना आश्रय स्थल बना लिया है। यह भी पढ़ें- चाकुलिया: कालापाथर में आजीविका महिला संकुल की वार्षिक आमसभा आयोजित,विधायक समीर मोहंती ने किया उद्घाटन ग्रामीणों के अनुसार, केंद्र साल में एक दिन भी नियमित रूप से न...