गोरखपुर, अक्टूबर 13 -- Gorakhpur News: गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। हिंदी सिनेमा में वर्ष 2010 से 2020 के बीच महिलाओं के प्रतिनिधित्व में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। महिला पात्रों की बढ़ती स्वतंत्रता के बावजूद फिल्मों में पितृसत्तात्मक सोच और पारंपरिक धारणाएं कायम है। यह जानकारी मनोविज्ञान विभाग की शोधार्थी आमना बानो के शोध में सामने आई है। यह शोध मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. गरिमा सिंह के निर्देशन में हुआ है। डॉ. गरिमा सिंह ने बताया कि यह गुणात्मक अध्ययन गोरखपुर में किया गया, जिसमें 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के लगभग बीस युवा प्रतिभागियों को शामिल किया गया। अध्ययन में महिला और पुरुष, दोनों प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई, ताकि हिंदी सिनेमा में महिलाओं के चित्रण को लेकर युवा दर्शकों के विविध दृष्टिकोणों को समझा जा...