गोरखपुर, अगस्त 20 -- Gorakhpur News: गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित सात दिवसीय व्याख्यानमाला के दूसरे दिन 'भगवद्गीता का जीवन दर्शन : निष्काम कर्मयोग' विषय पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी। मुख्य वक्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं आचार्य प्रो. द्वारका नाथ ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय संस्कृति-विज्ञान और जीवन-दर्शन का ऐसा अद्वितीय ग्रंथ है, जिसमें मानव जीवन की समस्याओं का केवल सैद्धांतिक विवेचन ही नहीं, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान का मार्ग भी प्रस्तुत किया गया है।

जीवन का परम लक्ष्य गीता मनुष्य को कर्म से पलायन नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य को निष्ठा, विवेक और समर्पण के साथ करन...