गोरखपुर, अगस्त 13 -- Gorakhpur News: गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता अंगदान और देहदान के मामले में महानगरवासी बेहद उदासीन हैं। नेत्रदान मरने के बाद जरूरतमंदों के जीवन में नई रोशनी लाता है। वहीं देहदान से मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र बेहतर चिकित्सक बन सकते हैं। यह भी पढ़ें- देहदान का संकल्प पूरा करने में भावना आड़े आ रहीनेत्रदान की स्थिति बीआरडी मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2018 से आईबैंक संचालित हैं। अब तक आईबैक को महज 60 कार्निया मिली हैं। जिनमें से 58 कार्निया पूर्वांचल के 58 मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं और दो कार्निया खराब हो गईं। नेत्ररोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामयश यादव ने बताया कि इन 60 कार्निया में से गोरखपुर से सिर्फ 12 कार्निया नेत्रदान के जरिए मिलीं। जो छह परिवारों के द्वारा नेत्रदान करने से संभव हुईं। इनमें दो पुरुषों और चार महिलाओं ...